Antonov An-24 एक भरोसेमंद पर पुराना विमान जिसने अब इतिहास बनने की ओर रुख़ किया है

   

Antonov An-24   एक ऐसा नाम जो कभी छोटे शहरों, पहाड़ी इलाकों और बर्फ से ढकी धरती पर उड़ने का प्रतीक था। लेकिन आज, ये वही नाम एक दुखद विमान हादसे से जुड़ा है।

1960 के दशक में सोवियत संघ में बना ये टर्बोप्रॉप एयरक्राफ्ट कभी स्थानीय उड़ानों के लिए सबसे भरोसेमंद गिना जाता था। इसका डिज़ाइन ऐसा था कि ये बिना पक्के रनवे, घने जंगलों या बर्फीले मैदानों पर भी बड़ी आसानी से लैंड कर सकता था। इसकी क्षमता 44 से 52 यात्रियों की थी और रेंज थी करीब 1,800 किलोमीट यानी एक शहर से दूसरे तक की दूरी तय करने में एकदम उपयुक्त।

वो दौर अलग था। तकनीक सीमित थी, संसाधन भी। और तब Antonov An-24 ने बहुत काम किया उसने सैकड़ों कस्बों को आपस में जोड़ा, दूरदराज़ क्षेत्रों में दवाइयां पहुंचाईं, और हज़ारों यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया।

लेकिन अब 60 साल बीत चुके हैं। दुनिया बदल चुकी है। तकनीक, सुरक्षा और मानक तीनों के मापदंड काफी ऊपर जा चुके हैं। पर दुर्भाग्यवश, An-24 जैसे विमान अब भी कुछ देशों में सेवा में हैं, ख़ासतौर पर रूस जैसे देशों में, जहां पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण नए विमानों की सप्लाई सीमित हो चुकी है।

2025 में जो हादसा हुआ, जिसमें 48 लोग मारे गए  वह इसी विमान के साथ हुआ। पुराने इंजन, सीमित सुरक्षा प्रणाली और मॉडर्न नेविगेशन की कमी जैसे कारणों ने इस हादसे को शायद टाला नहीं जा सका। और ये अकेली घटना नहीं है। पिछले एक दशक में An-24 से जुड़ी कई दुर्घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं।

अब यह सवाल हमारे सामने खड़ा है . क्या कोई विमान जो 50-60 साल पुराना है, उसे अब भी उड़ाना चाहिए? ज़िंदगी का मोल कोई आंक नहीं सकता, लेकिन इतना तो ज़रूर तय है कि पुराने ज़माने की मशीनों पर आज भरोसा करना खतरे से खाली नहीं है।

Antonov An-24 की कहानी मेहनत, विश्वसनीयता और सीमाओं को पार करने की कहानी रही है। लेकिन अब समय आ गया है कि इस विमान को सम्मान के साथ सेवा से मुक्त किया जाए ,ताकि हम फिर किसी ब्रेकिंग न्यूज़ में इसका नाम न सुनें, कम से कम हादसे के संदर्भ में नहीं।



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