रूस के आसमान में दर्द की कहानी: एक विमान, 48 ज़िंदगियाँ, और एक लम्हे की चूक
कल्पना कीजिए एक ठंडे, धुंध से ढके आसमान की , दूर‑दराज़ रूस का अमूर इलाक़ा, जहां ज़्यादातर दिन बर्फ़, पहाड़ और सन्नाटा ही बोलते हैं। ऐसे ही एक दिन, 24 जुलाई 2025 को, Angara Airlines की फ्लाइट 2G165 ने ब्लागोवेशचेंस्क से उड़ान भरी थी अपने गंतव्य Tynda के लिए।
बिल्कुल आम दिन था। कुछ लोग अपने रिश्तेदारों से मिलने जा रहे थे, कुछ शायद ऑफिस का काम निपटाने, और कुछ बच्चे गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने। कुल 48 लोग — 42 यात्री और 6 क्रू मेम्बर — किसी को क्या मालूम था कि ये उनकी आख़िरी उड़ान होगी।
पायलट की गलती या सिस्टम की?
जांच एजेंसियों ने कहा है कि शुरुआती सुराग़ बताते हैं कि पायलटों ने धुंध में लैंडिंग का गलत अंदाज़ा लगाया। इसे 'क्रू एरर' या मानव भूल कहा जा रहा है। लेकिन सवाल ये भी है — क्या ये सिर्फ़ इंसानी गलती थी? या फिर विमान की हालत, तकनीकी दिक्कतें, या शायद पुराने एविएशन सिस्टम भी दोषी हैं?
विमान का मॉडल था Antonov An-24 — एक ऐसा विमान जो लगभग 50 साल पुराना था, और कई एक्सपर्ट इसे सेवा से हटा देने की मांग पहले भी कर चुके थे।
48 कहानियाँ जो अधूरी रह गईं...
इस हादसे में 5 बच्चे भी मारे गए। किसी ने स्कूल की छुट्टियों में नानी के घर जाने का प्लान बनाया था, कोई शायद पहली बार विमान में बैठा हो। अब वो सब बस यादें हैं — जले हुए मलबे के नीचे दबी हुई यादें।
रूस में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना व्यक्त की और कहा, “भारत इस दुख की घड़ी में रूस के साथ खड़ा है।”
अब आगे क्या?
अभी जांच जारी है। विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है, और एविएशन एक्सपर्ट्स यह पता लगाने में लगे हैं कि क्या और कैसे इस हादसे से सीखा जा सकता है।
क्या यह हादसा टाला जा सकता था?
संभवतः हाँ। अगर विमान नया होता, टेक्नोलॉजी बेहतर होती, या क्रू को मौसम की स्थिति का बेहतर अनुमान होता।
यह हादसा हमें याद दिलाता है कि तकनीक कितनी भी तरक्की कर ले, एक छोटी सी चूक इंसानी ज़िंदगियों को छीन सकती है। हर उड़ान के पीछे दर्जनों सपने होते हैं — और जब एक विमान गिरता है, सिर्फ़ मलबा नहीं गिरता, बल्कि कई परिवारों की दुनिया उजड़ जाती है।
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